बुधवार, 7 जनवरी 2009

ओ मेरे आदर्शवादी मन जीवन क्या जिया?

3 टिप्‍पणियां:

अल्पना वर्मा ने कहा…

'अजनबी शहर में अजनबी रास्ते....
दिल को छू गयी यह ग़ज़ल --बहुत ही खूबसूरती से और पूरे भावों के साथ गई हुई ग़ज़ल--आवाज़ पहचानी नहीं जा रही.किस गायक ने गाई है???
किस की लिखी हुई है??कृपया यह जानकारी भी दें.

Santhosh ने कहा…

achchi gazal hai bhai saab... try to add Hariharan,gulam ali, mehandi hasan also..
h
want to know that,which application are u using for typing in Hindi...? is it user friendly...? when i was searching for the same...found 'quillapd'...do u know about it...? let me know...

Dheeraj ने कहा…

क्या ब्लॉग है? आपके ब्लॉग पर मैं आपके एक कमेंट के जरिए पहुंचा, लेकिन देख (सुन) कर तबीयत खुश हो गई. इस अनूठे प्रयोग को मैंने पहली बार महसूस किया. बधाई.

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बचपन की सुहानी यादों की खुमारी अभी भी टूटी नही है.. जवानी की सतरंगी छाँह आज़मगढ़, इलाहाबाद,बलिया और दिल्ली मे.. फिलहाल 24 वर्षों से मुम्बई मे.. मनोरंजन चैनल के साथ रोजी-रोटी का नाता......